एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट कोझीकोड एयरपोर्ट पर हुआ था क्रैश जानें किसकी गलती थी

Kozhikode

Kozhikode: केरल के कोझीकोड हवाई अड्डे पर रनवे से फिसलने की वजह से हुए विमान हादसे में दो पायलट समेत 18 लोगों की मौत बीते शुक्रवार की रात हो गई।

एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट दुबई से 191 लोगों को लेकर चला था।

लेकिन लैंडिंग के समयभारी बारिश की वजह से ये भीषण हादसा हुआ और विमान दो टूकड़ों में बंट गया।

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) को जब्त कर लिया है। जांच ब्यूरो दुर्घटना के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच करेगा।

अंतिम क्षण में पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच बातचीत को लेकर डीएफडीआर और सीवीआर महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता हैं।

लैंडिंग के लिए Kozhikode एयरपोर्ट का रनवे 10 असुरक्षित

मेंगलोर में एयर इंडिया की फ्लाइट दुर्घटना के बाद साल 2011 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय की सेफ्टी एडवायजरी कमेटी के सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन ने यह चेतावनी दी थी। उन्होंने इस बारे में चेयरमैन को पत्र भी लिखा था। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और अब यह दुर्घटना हो गई।

कैप्टन मोहन रंगनाथन ने एक अखबार के साथ चर्चा में कहा, मैंने चेतावनी दी थी कि करिपुर एयरपोर्ट सुरक्षित नहीं है। यहां लैंडिंग नहीं होनी चाहिए, विशेषकर बारिश के दौरान।

यह एक टेबल टॉप रनवे है, जिसमें ढलान है और रनवे के अंत में बफर जोन भी छोटा है।

रंगनाथन के अनुसार, टोपोग्राफी के हिसाब से रनवे के बाद 240 मीटर का बफर जोन होना चाहिए, लेकिन करिपुर में यह 90 मीटर ही है।

रनवे के बाजू में भी 100 मीटर जगह होनी चाहिए, लेकिन यहां वह भी 75 मीटर ही है। इसके बावजूद इसे डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने अनुमति दी है।

रंगनाथन ने कहा कि कोझिकोड के रनवे नंबर 10 को तुरंत बंद करना चाह। इसके बफर जोन को भी 240 मीटर करना चाहिए।

हालांकि ऐसे कई संभावित कारण हो सकते हैं जो ग्लोबल फ्लाइट ट्रैकर वेबसाइट फ्लाइटरडार24 डॉट कॉम के आधार पर अनुमान लगा सकते हैं,

जिससे पता चलता है कि फ्लाइट ने दो बार लैंडिंग करने की कोशिश की।

कुछ ऐसे परिदृश्य हो सकते हैं जो इस भीषण दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।

तकनीकी खामियां

सोशल मीडिया ने तकनीकी खराबी की ओर इशारा किया, जैसे कि लैंडिंग गियर में रूकावट आना जो पायलट को दो बार लैंडिंग करने से रोका।

हालांकि, विशेषज्ञ इस बात को खारिज करते हुए कहते हैं कि ऐसी स्थिति में, पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) को मे-डे संकेत देता है जो लैंडिंग से पहले आवश्यक आपातकालीन व्यवस्था जैसे एम्बुलेंस और फायर टेंडर किया जाता है।

इन व्यवस्थाओं के एयरपोर्ट पर उपलब्ध होने तक पायलट लैंडिंग नहीं करता है। लेकिन, यहां ऐसा नहीं हुआ।

ईंधन की कमी

चूंकि हादसे के बाद विमान में आग नहीं लगी, इस वजह से अटकलें लगाई जा रही हैं कि फ्लाइट मे ईंधन की कमी हो सकती है। एक और कारण हो सकता है कि पायलट ने वैकल्पिक गंतव्य पर जाने की बजाय लैंडिंग करने का फैसला किया हो।

विशेषज्ञ इस तर्क से सहमत नहीं होते हैं, क्योंकि यह फिर से एक स्थिति को जन्म देता है जहां पायलट को एटीसी को संकट संकेत देना चाहिए था।

हवाई सुरक्षा मानदंडों के अनुसार प्रत्येक विमान पर्याप्त ईंधन ले जाता है।

ताकि गंतव्य हवाई अड्डे पर किसी भी संकट की स्थिति में यह निकटतम वैकल्पिक हवाई अड्डे पर उड़ान भर सके।

पायलट में अधिक आत्मविश्वास होना

वरिष्ठ पायलटों के एक सेक्शन का मानना है कि चूंकि इन-कमांड कैप्टन दीपक साठे भारतीय वायु सेना में बहुत वरिष्ठ पायलट थे, इसलिए हो सकता है कि वह अति आत्मविश्वास में हों।

साथ ही, एयर इंडिया के अनुसार, वह 27 बार पहले भी उसी हवाई अड्डे पर विमान की लैंडिंग करा चुके थे।

एक पायलट ने कहा, “कभी-कभी, वायु सेना के पायलट, अपनी पृष्ठभूमि की वजह से, एक कठिन स्थिति को संभालने के लिए अधिक आश्वस्त होते हैं।”

लेकिन उनकी टिप्पणी का एक अन्य पायलट ने खंडन किया। उन्होंने कहा, अब तक जब तक मैं कैप्टन साठे को जानता था।

उनके पास एक लंबा अनुभव था और वे अपने आकलन में कभी भी गलत नहीं होंगे।

अंतिम रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करें।

रनवे की लंबाई:

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न लिखने की शर्त बताया, “हमने दो साल पहले 2860 मीटर से 2700 मीटर तक रनवे को छोटा किया।

इसने रनवे के दोनों तरफ 240 मीटर की दूरी पर आरईएसए बनाया है। यह अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के मानक के अनुसार पर्याप्त से अधिक है।

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